Monday, March 20, 2017

ਦੁਰਯੋਧਨ ਅੱਜ ਮੈਂ ਹਾਂ


(चुपचाप अट्टहास-27 का अनुवाद – जतिंदर कौर द्वारा)


ਰਾਜ-ਗੱਦੀ 'ਤੇ ਦੁਰਯੋਧਨ ਮੈਂ


ਜ਼ੁਬਾਨ ਹੰਭ ਗਈ ਏ

ਅੱਗ ਦੀਆਂ ਲਾਟਾਂ ਬੈਂਗਣੀ ਪੰਖੜੀਆਂ ਬਣ

ਮੇਰੇ ਸੁਫ਼ਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੀਆਂ ਨੇ

ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਮੈਂ ਭਸਮ ਕਰਨਾ ਲੋਚਿਆ,

ਉਹ ਟਿਮਟਿਮਾਉਂਦਿਆਂ ਮੈਨੂੰ ਚਿੜ੍ਹਾਉਂਦੇ ਨੇ

ਮਿਟਾਇਆਂ ਨਹੀਂ ਮਿਟ ਰਿਹਾ ਰਾਗ ਬਸੰਤ ਬਹਾਰ

ਹਰ ਰੋਜ਼ ਪੁੰਗਰਦਾ ਏ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਪੌਦਾ



ਸੁਣ ਵੇ! ਤੂੰ ਜੋ ਏਨੀ ਕਾਹਲ 'ਚ ਏਂ

ਭੁੱਲ ਨਾ ਜਾਵੀਂ ਕਿ ਇਹ ਦੌਰ ਮੇਰਾ ਏ

ਤਵਾਰੀਖ਼ ਦਾ ਪਹੀਆ ਮੇਰੇ ਹੱਥੋਂ ਘੁੰਮ ਰਿਹਾ ਏ

ਏਸ ਗੱਲੋਂ ਅਣਜਾਣ ਕਿ

ਅਖੀਰ ਆਉਂਦਾ ਏ ਹਰ ਨ੍ਹੇਰੇ ਦਾ

ਗੁਸਤਾਖ਼ੀ ਦੀਆਂ ਤਮਾਮ ਹੱਦਾਂ ਪਾਰ ਕਰ ਰਹੇ ਨੇ ਮੇਰੇ ਚੇਲੇ



ਹੁੰਦਾ ਹੋਵੇਗਾ ਅਖੀਰ ਹਰ ਨ੍ਹੇਰ ਦਾ

ਹਨੇਰੇ ਜੁਗ ਦੀ ਏਸ ਰਾਜ-ਗੱਦੀ 'ਤੇ ਬੈਠਾ

ਦੁਰਯੋਧਨ ਅੱਜ ਮੈਂ ਹਾਂ।



Saturday, March 18, 2017

चुपचाप अट्टहास - 27 :‌सिंहासन पर दुर्योधन मैं


जीभ थक गई है

आग की लपटें बैंगनी पंखुड़ियाँ बन मेरे सपनों में आती हैं

जिन सितारों को मैंने भस्म करना चाहा,

वे टिमटिमाते मुझे चिढ़ाते हैं

मिटाए नहीं मिट रहा राग बसंत बहार

हर दिन चीखता है एक नया पौधा



अरे! तुम जो इतनी जल्दी में हो

भूलो मत कि यह दौर मेरा है

इतिहास का चक्का मेरे हाथों घूम रहा है



इस बात से अंजान कि

अंत होता है हर अंधकार का

उद्दंडता की हदें पार कर रहे हैं मेरे अनुचर



होता होगा अंत हर अंधकार का

अंधे युग के इस सिंहासन पर बैठा

दुर्योधन आज मैं हूँ।



My tongue cannot take it any more

Fire rises in my dreams as violet petals

The stars that I desired to burn down

They twinkle and tease me

And the Spring melody continues

Every day a new plant germinates



And you who are in such hurry

Forget not that these are my times

I wheel the history



My followers do not know that

All shades of dark end some day

And they are crossing limits of lumpen lust



Who cares if all darkness ends

I am Duryodhana

I sit on the throne in these dark times.

Wednesday, March 15, 2017

ਕੋਈ ਰੂਹਾਨੀ ਫ਼ਲਸਫ਼ਾ ਨਹੀਂ ਬਚੇਗਾ - चुपचाप अट्टहास-26 का पंजाबी अनुवाद

प्यारी साथी जतिंदर ने पिछली पोस्ट वाली कविता का पंजाबी में अनुवाद किया है।


ਕੋਈ ਰੂਹਾਨੀ ਫ਼ਲਸਫ਼ਾ ਨਹੀਂ ਬਚੇਗਾ



ਮੈਂ ਭਵਿੱਖ

ਮਾਨਤਾਵਾਂ, ਮੁੱਲਾਂ ਨੂੰ ਖਾਰਿਜ ਕਰਦਾ

ਖ਼ਾਲਸ ਲਹੂ ਦੀ ਤ੍ਰੇਹ ਨੂੰ ਮੂਹਰੇ ਰੱਖਦਾ

ਨਵਾਂ-ਨਵੇਰਾ ਭਵਿੱਖ।



ਜਿਹੜੇ ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਕਾਲੇ ਮੀਂਹ ਦੀ ਵਾਛੜ 'ਚ ਨਹੀਂ ਭਿੱਜੇ

ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਜੇ ਪਿਆਰ ਦਾ ਆਸਰਾ ਹੈ

ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਓ ਕਿ

ਤੁਹਾਡੀ ਖੱਲ ਤੋਂ ਅੰਬਰ ਤੀਕ ਫੈਲਣਗੇ ਵਿਰਲਾਪ ਕਰਦੇ ਬੱਦਲ਼

ਗਹਿਰੇ ਹੁੰਦੇ ਜਾਂਦੇ ਅੰਨ੍ਹੇ ਖਾਲੀਪਣ ਵਿੱਚ

ਮੇਰਾ ਸਾਥ ਰਵੇਗਾ ਹਰ ਪਲ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ

ਹਰ ਪਲ ਤੁਫ਼ਾਨ ਦਾ ਖ਼ਦਸ਼ਾ ਹੋਵੇਗਾ

ਹਰ ਪਲ ਰੁਕੀ ਹੋਵੇਗੀ ਹਵਾ

ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਜ਼ਹਿਰ ਘੁਲਦਾ ਚਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ

ਮੇਰੀਆਂ ਵਿਉਂਤਾਂ ਫੈਲ ਜਾਣਗੀਆਂ ਪਿੰਡ, ਸ਼ਹਿਰ,ਹਰ ਪਾਸੇ

ਕਿਤੇ ਕੋਈ ਪਿਆਰ ਨਹੀਂ ਬਚੇਗਾ

ਕੀੜੀਆਂ ਵਾਂਗ ਰੇਂਗਣਗੀਆਂ ਇਨਸਾਨੀ-ਫ਼ੌਜਾਂ



ਕੋਈ ਰੂਹਾਨੀ ਫ਼ਲਸਫ਼ਾ ਨਹੀਂ ਬਚੇਗਾ

ਰੂਹ ਲਫ਼ਜ਼ ਬਾਕੀ ਨਹੀਂ ਰਹੇਗਾ



ਮੈਂ ਭਵਿੱਖ

ਮਾਨਤਾਵਾਂ,ਮੁੱਲਾਂ ਨੂੰ ਖਾਰਿਜ ਕਰਦਾ

ਖ਼ਾਲਸ ਲਹੂ ਦੀ ਤ੍ਰੇਹ ਨੂੰ ਮੂਹਰੇ ਰੱਖਦਾ ਨਵਾਂ,ਨਵੇਰਾ,ਭਵਿੱਖ।



(चुपचाप अट्टहास-26 का अनुवाद – जतिंदर कौर द्वारा)

Tuesday, March 14, 2017

26. कोई रुहानी फलसफा नहीं बचेगा


मैं भविष्य


मान्यताओं, गुणवत्ताओं को खारिज करता


खालिस ख़ून की प्यास को सबसे पहले पेश रखता


नव-नव्य भवितव्य।





जो अभी तक काली बारिश के छींटों में भीगे नहीं हैं


जिन्हें अब तक किसी के प्यार का सहारा है


तैयार हो जाओ कि


तुम्हारी चमड़ी से आस्मान तक फैलेंगे विलाप करते बादल


गहराते अँधेरे खालीपन में मेरा साथ होगा हर पल तुम्हारे साथ


हर पल तूफान का अंदेशा होगा


हर पल थमी होगी हवा


आँखों में ज़हर घुलता चलेगा


मेरी योजनाएँ होंगी गाँव शहर हर ओर


कहीं कोई प्यार नहीं बचेगा


पिपीलिकाओं सी चलेंगी मानव-सेनाएँ


कोई रुहानी फलसफा नहीं बचेगा


रूह लफ्ज़ बाक़ी न होगा


मैं भविष्य


मान्यताओं, गुणवत्ताओं को खारिज करता


खालिस ख़ून की प्यास को सबसे पहले पेश रखता


नव-नव्य भवितव्य।





I am the future


I dismiss the norms, the values


I am the new, the newer, future


I ask for a drink of pure blood first.




For those who are yet to feel the black rain


Those who still live with love


I say get ready


For mournful clouds will emerge from your skin and 

reach the skies


You will not every moment of the deepening dark 

emptiness escape me


Every moment you will fear a storm


Every moment there will be a lull


And poison will deepen in your eyes


My schemes will span all villages, towns and 

elsewhere


Love will find no place anymore


Armies of humans will parade like ants


No thought spiritual will survive


The word soul will be obliterated






I am the future


I dismiss the norms, the values


I am the new, the newer, future


I ask for a drink of pure blood first.  

Thursday, March 09, 2017

चुपचाप अट्टहास: 25 - मैं कुचलता हर कविता, हर फूल, हर प्यार को हूँ


अनगिनत बार खुद को संजोया

बिखरने को क्या कुछ नहीं दुनिया में

धरती का कोई कोना नहीं

जहाँ छिपा रह सकता है कोई झुरमुटों के बीच


तारों तक की पहुँच बस कविता में है

नायकों का कद तारों जैसा विशाल

आभा तारों जैसी प्रभामय

सच यह कि आँखें खुली न हों तो

महानायक भी ठोकर खा बैठते हैं


अनगिनत बार समझे हैं ब्रह्मांड के कानून

तड़प उबलती है अंदर की गलियों में

सँभाले हैं रंग बदरंग

कानून के रंग जाने हैं


आज मैं कानून हूँ

इतिहास हूँ भविष्य हूँ

हवा, पानी, ज़मीं, आस्माँ
 
मैं कुचलता हर कविता, हर फूल, हर प्यार को हूँ

मुझे कौन बाँधेगा आज?

मैं पहाड़, सीने में लिए हूँ चट्टानों की जड़ें हूँ

सूखी, बेजान चट्टानें

बढ़ती जा रहीं, समेटतीं मिट्टी का हर कण।


Forever-and-ever I took hold of myself

There is enough in the world to lose oneself

No part of Earth has bushes

For you to hide


Only poetry reaches the stars

With heroes as big as the stars

Their radiance like stars

The Truth is that with eyes closed

Even such supermen sprain their feet


Forever and ever I have learned the laws of the 

universe

My innards burn

As I manipulate the laws

The laws in all their colours


I am the law today

I am history and I am the future

I crush the air, the waters, the land and the sky

I demolish every poem, flower or love

Who catches me today?

I am the mountain, I carry the roots of rocks in my 
chest
The ever expanding, dry, lifeless rocks

Swallowing every atom of earth.

Tuesday, March 07, 2017

24. सर डंबूद्वीप फर्स्ट


भीत से ईंट दर ईंट बढ़ती दीवार


पलता बच्चा और बढ़ता वयस्क कद तक


मैंने पाली बढ़ाई नफ़रत अपने अंदर अरसे से


कह नहीं सकता कि कहाँ शुरुआत हुई थी


माँ बाप तो मेरे आम ही थे


कोई मुहल्ले का दादा याद नहीं आता


जिसने बिगाड़ी हो दिमागी सेहत


बस यही कि जितनी जोर से चीखता हूँ


चौड़ा सीना दिखलाता


उतना ही तीखा डर है बसा अंदर


नींद से उठ बैठता हूँ रातों को जाने कैसे सपने देखकर


कोई फूलों का गुलदस्ता बढ़ाता है


मैं खुश होना चाहता हूँ


पर फूल सड़ गए हैं


उनकी बदबू से मेरे अनुचरों के सिवा हर कोई मुरझाने लगता है


चीख उठता हूँ फर्स्ट फर्स्ट


याद नहीं आता कि किसके लिए कह रहा हूँ


प्रहरी कह जाते हैं जी सर डंबूद्वीप फर्स्ट


फिर सो जाता हूँ


होंठ बुदबुदाते ही रह जाते हैं


सपने में घंटियाँ बजती हैं


बजती ही रहती हैं।




From its foundations rises a wall


A child grows into an adult


I nourished hatred in me for ages


I cannot say when it started


My parents were ordinary folks


I do not remember if any neighbourhood lumpen


Damaged my mental health


All I know is that as loud I scream


Showing my broad chest


Equally intense is the fear in me


Bizarre nightmares wake me up in the middle of the 
night


Someone offers me a bouquet of flowers


I wish to be happy


But the flowers are rotting


The stink disgusts all but my followers


I scream ‘first first’


I cannot remember who is it for that I scream


The guards come and tell me that I mean it for the 
dumbo-land


And then I go back to sleep


With my lips muttering


Bells ringing in my dreams


They ring and ring. 

Monday, March 06, 2017

चुपचाप अट्टहास - 23 : वहीं से चलते हैं चाकू छुरी हथियार

चाहता रहा कि ऊपर चढ़ता जाऊँ
इतना कि हर कोई चींटी से भी छोटा दिखे
तुम अपने कद के ऊपर या नीचे नहीं देखना चाहते
ऊपर चढ़ते हुए मैं खुद औरों की नज़रों में बौना होता रहा
तुम औरों को खींच कर अपने कद तक लाने में हुए लहूलुहान
ब्रह्मांड के नियम ऐसे ही हैं
शिकार होते हैं हम अपनी इच्छाओं का
इच्छाएँ आती हैं
अंतर्मन में अंजाने ही गहरे कहीं घर कर जाती हैं
वहीं से चलते हैं चाकू छुरी हथियार
शून्य से भरे इस देह में
हम रोते हैं
इतिहास के पास शिकवा ले जाते हैं
हवाएँ कातिल या मसीहा बनाकर
साँय-साँय ले जाती हैं हमें कायनात के कोनों में
शिकार हम उड़ते गिरते रहते हैं
पटखनियाँ खाते।

I desired to rise so far up
That everyone should appear like an ant
Yo do not worry about beings taller or shorter 

As I moved high up
Others found me lesser
You were left to nothing in raising others to your heights
Such are the rules of the universe
We are victims of our desires
Desires come
And find place in the inner mind unknowingly
From there are shot the bullets, the arrows
We lament in our bodies
Made of emptiness
We carry our resentments to history
And the winds act as the killer or the messiah

Whirring us away to the corners of the universe
We as prey rise and fall
All flat.